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Kerala: केरल में विशेष शिक्षकों की नियमित नियुक्ति तेज, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार सक्रिय: शिवनकुट्टी

तिरुवनंतपुरम।

केरल सरकार ने दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है। शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने शनिवार को बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर फैलाए जा रहे फर्जी प्रचार से लोगों को सतर्क रहने की अपील की।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई प्रक्रिया

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष शिक्षकों के पद सृजित करने और उनकी नियमित नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि रिक्त पदों की जानकारी शिक्षा विभाग और सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए तथा प्रमुख समाचार पत्रों में नोटिस जारी हों।
नियुक्तियां भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर की जाएंगी।

तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग समिति गठित

सरकार ने विशेष शिक्षकों की जांच और नियमितीकरण के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, सामान्य शिक्षा विभाग के सचिव और आरसीआई का एक प्रतिनिधि शामिल है।
यह समिति पिछले करीब 20 वर्षों से संविदा या दैनिक वेतन पर कार्यरत विशेष शिक्षकों की योग्यताओं की समीक्षा करेगी। जरूरत पड़ने पर आयु सीमा में छूट देकर पात्र शिक्षकों को उचित वेतनमान में नियमित किया जाएगा।

2,707 विशेष शिक्षकों को मिल सकता है लाभ

वर्तमान में समग्र शिक्षा केरल के तहत 2,707 विशेष शिक्षक संविदा पर कार्यरत हैं। सरकार का कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को नियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

हलफनामे को लेकर फैली गलतफहमी

सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय मांगते हुए अदालत में सकारात्मक हलफनामा दाखिल किया है। मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ लोग इस हलफनामे की गलत व्याख्या कर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

शिक्षक-छात्र अनुपात और क्लस्टर प्रणाली

केंद्र के शिक्षा मंत्रालय के मानकों के अनुसार, केरल प्राथमिक स्तर पर 10:1 और उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर 15:1 का शिक्षक-छात्र अनुपात सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही विशेष शिक्षकों की प्रभावी तैनाती के लिए क्लस्टर प्रणाली लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

सरकार ने दोहराया कि विशेष शिक्षकों के हितों की रक्षा और दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

Sainv Sandesh
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