कोलकाता/पश्चिम बंगाल। राज्य में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो गया। कुछ स्थानों पर मामूली झड़पों को छोड़ दें तो किसी बड़ी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। चुनाव को निष्पक्ष और भयमुक्त बनाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई थी।

जानकारी के मुताबिक, दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान कराया गया, जिसके लिए करीब 2.4 लाख केंद्रीय जवानों को मैदान में उतारा गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए 2300 से अधिक कंपनियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा 4000 क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और 300 से ज्यादा बख्तरबंद वाहन भी विभिन्न संवेदनशील इलाकों में लगाए गए।
कोलकाता में मल्टी-एजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था, जिसमें केंद्रीय बलों, राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बना रहा। मतदाताओं को भरोसा दिलाने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए थे, ताकि किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
विपक्ष ने उठाए सवाल
केंद्रीय बलों की इतनी बड़ी तैनाती को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल भी खड़े किए। तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि अब तो चुनाव में राफेल विमान और नौसेना के जहाजों की तैनाती ही बाकी रह गई थी। उनका कहना था कि इतनी भारी सुरक्षा की जरूरत सीमाओं पर होती है, न कि चुनाव में।
चुनाव के बाद भी रहेगी फोर्स की मौजूदगी
अधिकारियों के अनुसार, मतदान खत्म होने के बाद भी राज्य में केंद्रीय बलों की मौजूदगी बनी रहेगी। पिछली बार चुनाव के बाद हुई हिंसा को देखते हुए इस बार करीब 500 कंपनियों को एहतियातन तैनात रखा जाएगा, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
डीजी स्तर के अधिकारियों ने संभाली कमान
चुनाव के दौरान सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और आम लोगों से संवाद कर उन्हें निर्भय होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया।
सात चरणों में हुई तैनाती
चुनाव से पहले ही फरवरी से केंद्रीय बलों की चरणबद्ध तैनाती शुरू कर दी गई थी। सात चरणों में हजारों कंपनियों को पश्चिम बंगाल भेजा गया, जिससे हर संवेदनशील बूथ पर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
केंद्रीय बलों को मिली अहम जिम्मेदारी
अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों को तैनात किया गया, जहां उन्होंने मतदाताओं की पहचान जांच से लेकर सुरक्षा की कमान संभाली। कई स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी की जिम्मेदारी भी केंद्रीय एजेंसियों को दी गई।
👉 कुल मिलाकर, भारी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता के चलते दूसरे चरण का मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। अब सबकी नजरें चुनाव परिणाम और आगे की स्थिति पर टिकी हैं।
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