📰 E-Paper (Edition)

📖 Sainv Sandesh का E-Paper अब पढ़ें ऑनलाइन।

Read Weekly E-Paper
Advertisement
⚡ Solar से बिजली बिल बचाएं
LEOSUN SOLARIZE LLP
📞 Call Now

👉 Solar System लगवाकर 70–90% तक बिजली बिल में बचत करें। Free Site Visit और Subsidy Support उपलब्ध है।

“Solar लगाओ – बिजली बिल भगाओ!” ⚡🌞

यूपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर मामलों के आरोपियों को पुलिस भर्ती में नहीं मिलेगी नियुक्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस भर्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस विभाग में नौकरी नहीं दी जा सकती, चाहे उन्हें अभी तक किसी मामले में दोषी साबित न किया गया हो।

अदालत ने कहा कि पुलिस सेवा केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और जनता के भरोसे से जुड़ी जिम्मेदार सेवा है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी का चरित्र और पृष्ठभूमि बेहद अहम मानी जाएगी।

कोर्ट ने याचिका की खारिज

यह फैसला न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की एकल पीठ ने शेखर नामक अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने अदालत में दलील दी थी कि उसके खिलाफ दर्ज मुकदमा दुर्भावना के तहत कराया गया है और अभी तक किसी भी मामले में उसकी दोषसिद्धि नहीं हुई है, इसलिए उसे पुलिस भर्ती से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि केवल दोष सिद्ध न होना नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं बनाता।

“निष्कलंक चरित्र जरूरी”

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस जैसी अनुशासित और संवेदनशील सेवा में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का निष्कलंक चरित्र होना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप लंबित हैं, तो संबंधित प्राधिकारी उसके आचरण और पृष्ठभूमि के आधार पर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त मान सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में चरित्र सत्यापन भर्ती प्रक्रिया का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह ऐसे लोगों को सेवा में आने से रोके, जिनकी पृष्ठभूमि विभाग की छवि और अनुशासन को प्रभावित कर सकती है।

जनता के भरोसे से जुड़ा मामला

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग समाज में कानून लागू करने वाली संस्था है। यदि गंभीर आरोपों से घिरा कोई व्यक्ति पुलिस सेवा में शामिल होता है, तो इससे जनता का विश्वास कमजोर पड़ सकता है। इसलिए नियुक्ति के मामलों में केवल कानूनी स्थिति ही नहीं, बल्कि अभ्यर्थी की सामाजिक और नैतिक छवि भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

📺 Live News Videos