यूपी एमएलसी चुनाव: भाजपा ने खोले पत्ते, पांच उम्मीदवारों के नाम घोषित, अनुभवी नेताओं पर जताया भरोसा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से होने वाले चुनाव के लिए पार्टी ने पांच उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने इस बार नए चेहरों को मौका देने के बजाय अनुभवी और मौजूदा सदस्यों पर भरोसा जताया है।

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पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उमेश द्विवेदी को मैदान में उतारा गया है।

इसके अलावा आगरा स्नातक सीट पर डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाया गया है। ये सभी वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं और संगठन के सक्रिय चेहरों में शामिल माने जाते हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तैयारी तेज

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने संगठनात्मक मजबूती और अनुभव को प्राथमिकता दी है। पार्टी नेतृत्व ने उन नेताओं पर भरोसा जताया है जो पहले से ही संबंधित क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं और जिनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

दिसंबर में पूरा होगा कार्यकाल

घोषित किए गए अधिकांश प्रत्याशियों का मौजूदा कार्यकाल इस वर्ष 26 दिसंबर तक है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधान परिषद चुनाव सितंबर माह में ही कराए जा सकते हैं, जिसके चलते सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

11 सीटों पर होना है चुनाव

जानकारी के अनुसार इस वर्ष कुल 11 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें भाजपा के छह, समाजवादी पार्टी के तीन तथा दो निर्दलीय सदस्य शामिल हैं। रिक्त होने वाली सीटों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

सपा पहले ही कर चुकी है उम्मीदवारों की घोषणा

समाजवादी पार्टी पहले ही अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। अब भाजपा की सूची आने के बाद विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीतिक दिशा और दलों की संगठनात्मक ताकत का संकेत भी देंगे।

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