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UP Politics: अखिलेश और ब्रजेश पाठक के बीच जुबानी जंग तेज, बयानों को लेकर सियासत गरमाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इस बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने प्रदेश की सियासत को नया रंग दे दिया है।


हाल ही में एक राजनीतिक संवाद के दौरान पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल खड़े किए। इस दौरान उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सपा की राजनीति और उसके सामाजिक समीकरणों को निशाने पर लिया।

पीडीए पर भाजपा का हमला

नरेंद्र कश्यप ने बातचीत के दौरान कहा कि पीडीए कोई सामाजिक न्याय का मॉडल नहीं बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है, जिसका लाभ केवल सीमित वर्ग को मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों के हितों की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में उसका लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रहता है।

अखिलेश का पलटवार

भाजपा की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने में सरकार अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है और जनता स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर परेशान है।

अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जब मंत्री अपने विभाग में सफल नहीं हो पाते तो वे दूसरे विषयों पर चर्चा करके सुर्खियां बटोरने का प्रयास करते हैं।

ब्रजेश पाठक का जवाब

अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और विचारों का आदान-प्रदान राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा की जा रही आलोचना से वह विचलित नहीं हैं और जनता के हित में अपना कार्य लगातार जारी रखेंगे।

पाठक ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और विमर्श की परंपरा सदैव रही है और इसे नकारना उचित नहीं है।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सक्रियता

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। दोनों दल अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं और इसी वजह से नेताओं के बीच बयानबाजी का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।

सियासी गलियारों में चर्चा

अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं की ओर से और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीति का माहौल और गरमाने के आसार हैं।

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