West Bengal: मतगणना से पहले बढ़ा सियासी तनाव, शुभेंदु अधिकारी ने संविदा कर्मियों की तैनाती पर उठाए सवाल
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना ड्यूटी के लिए संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
“निष्पक्षता पर पड़ सकता है असर”
शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि मतगणना जैसे संवेदनशील कार्य में जीविका सेवक, डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) और अन्य अस्थायी कर्मियों की तैनाती चिंता का विषय है। उनके अनुसार ये कर्मचारी स्थायी सरकारी ढांचे का हिस्सा नहीं होते, जिससे उन पर बाहरी दबाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन कर्मियों को ईवीएम की मूवमेंट, वीवीपैट सीलिंग और पोस्टल बैलेट की गिनती जैसे अहम कार्यों में लगाया जा रहा है, जो पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
आयोग से क्या मांग?
भाजपा नेता ने मांग की है कि मतगणना में केवल नियमित और स्थायी सरकारी कर्मचारियों को ही जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही पश्चिम मिदनापुर जिले में तैनात कर्मियों का ऑडिट कर संविदा स्टाफ को हटाने की अपील भी की है।
टीएमसी का अलग रुख
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पहले केंद्रीय और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों की तैनाती पर आपत्ति जताई थी। इससे साफ है कि मतगणना प्रक्रिया को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास बना हुआ है।
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
इस विवाद ने न्यायिक रूप भी ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विशेष पीठ गठित कर सुनवाई की, लेकिन फिलहाल किसी नए आदेश से इनकार कर दिया है। यह याचिका तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
अब सबकी नजर नतीजों पर
मतगणना को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक तनातनी के बीच जनता का जनादेश किसके पक्ष में जाता है।
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