Ayodhya News: राम मंदिर दान विवाद पर सियासत गरम: ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव पर पलटवार, स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सपा का जवाब
लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दानपात्र से कथित धन गबन के आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले में पारदर्शिता की मांग उठाई, तो दूसरी ओर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनके बयान पर तीखा जवाब देते हुए उनकी राजनीतिक सोच पर सवाल खड़े किए।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि क्या उन्होंने कभी बाबरी मस्जिद के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर कोई सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख केवल वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं तथा सनातन परंपराओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनकी सोच नकारात्मक रही है।
वहीं, ब्रजेश पाठक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मुद्दा बनाया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि मंत्री को पहले अपने विभाग की स्थिति पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन सरकार जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है।
ट्रस्ट और प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
अखिलेश यादव ने श्रीराम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कथित गड़बड़ी से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं, लेकिन बाद में आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग बयान दिए गए, जिससे स्थिति और स्पष्ट नहीं हो सकी।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
राम मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। जहां भाजपा इसे सपा की राजनीतिक रणनीति बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
फिलहाल, दानपात्र से कथित गबन को लेकर उठे विवाद के बीच राजनीतिक बयान लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।
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