अयोध्या: राम मंदिर दान मामले में कई सवाल बरकरार, जांच के घेरे में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था

83 करोड़ से अधिक चढ़ावा मिलने के बावजूद दान प्रबंधन पर उठे सवाल, सुरक्षा पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी अनियमितताओं की जांच जारी

अयोध्या। श्रीराम मंदिर में प्राप्त दान राशि के प्रबंधन को लेकर चल रही जांच लगातार नए पहलुओं को सामने ला रही है। जांच एजेंसियां केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं की ही नहीं, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी गहन पड़ताल कर रही हैं।

Photo: AUP


सूत्रों के अनुसार, जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनके आधार पर दान संग्रह, उसकी गणना, सुरक्षित रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है। जांच टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि व्यवस्थागत कमियों ने कहीं किसी प्रकार की अनियमितता को बढ़ावा तो नहीं दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर करोड़ों का खर्च

मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय अभिलेखों के अनुसार बीते 11 महीनों में सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस दौरान आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम, निजी सुरक्षा कर्मियों और अन्य सुरक्षा संसाधनों पर व्यय किया गया था। इसके बावजूद दान राशि के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज कर दी है।

11 माह में 83 करोड़ रुपये का चढ़ावा

उपलब्ध वित्तीय विवरण के अनुसार, मंदिर को विभिन्न माध्यमों से लगभग 83 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। इसमें दान पेटियों से बड़ी राशि प्राप्त हुई, जबकि काउंटर, ऑनलाइन माध्यमों और अन्य स्रोतों से भी उल्लेखनीय योगदान दर्ज किया गया।

एसआईटी की जांच जारी

विशेष जांच दल लगातार संबंधित कर्मचारियों, प्रबंधन से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रहा है। जांच एजेंसियां दान की गणना, रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी तंत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी समीक्षा की जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जवाबदेही तय करने पर जोर

जांच का प्रमुख उद्देश्य केवल किसी एक व्यक्ति की भूमिका तलाशना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि व्यवस्थागत स्तर पर कहां कमियां रहीं। इसी कारण प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा तंत्र से जुड़े कई पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया है।

उच्च न्यायालय में भी पहुंचा मामला

मामले को लेकर न्यायालय में भी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें स्वतंत्र जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग की गई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

फिलहाल जांच एजेंसियां विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्र कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच में जुटी हुई हैं।

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