लखनऊ अग्निकांड: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 15 मौतों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

लखनऊ। राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस हादसे में 15 युवाओं की जान जाना राज्य की व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि वर्तमान सुरक्षा तंत्र न तो पर्याप्त है और न ही प्रभावी।


Photo : AUP

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भवन निर्माण नियमों, अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने संबंधी विस्तृत कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 2022 के लेवाना होटल अग्निकांड सहित पूर्व की घटनाओं का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता दिखाई देता है, जो चिंता का विषय है।

अदालत ने इस मामले में आवास एवं शहरी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के आयुक्त, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक तथा प्रमुख सचिव (ऊर्जा) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित विभागों को 4 अगस्त से पहले अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।

यह जनहित याचिका स्थानीय अधिवक्ता शिवेंदु पांडेय की ओर से दायर की गई है। याचिका में अग्निकांड की स्वतंत्र, समयबद्ध और न्यायालय की निगरानी में जांच कराने के लिए समिति गठित करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही भी न्यायालय में उपस्थित रहे।

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