राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: एसआईटी रिपोर्ट में टिन्नू यादव की भूमिका प्रमुख, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में पेश कर दी गई। रिपोर्ट में मंदिर परिसर में हुंडियों की चाबियां संभालने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका को प्रमुख माना गया है। जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपने भतीजे मनीष यादव को ट्रस्ट में नौकरी दिलाकर गणना प्रक्रिया में शामिल कराया था।



रिपोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में आरोपी कई बार रकम निकालते हुए दिखाई दिए हैं। हालांकि जांच एजेंसी को केवल लगभग 45 दिनों की फुटेज ही उपलब्ध हो सकी, इसलिए इससे पहले की गतिविधियों और कुल गबन राशि का सटीक आकलन नहीं हो पाया है।

एसआईटी रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • गणना कक्ष में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा पालन नहीं किया गया।

  • प्रवेश नियंत्रण, तलाशी, निर्धारित वेशभूषा और निजी सामान की जांच जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी नहीं थीं।

  • ट्रस्ट और बैंक प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद निगरानी पर्याप्त नहीं रही।

  • सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद फुटेज की सक्रिय निगरानी नहीं की गई।

  • जांच टीम ने भविष्य में कम से कम 180 दिनों तक सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सिफारिश की है।

गणना प्रभारी पर भी जिम्मेदारी

रिपोर्ट में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, उनकी मौजूदगी में कथित अनियमितताएं हुईं, इसलिए उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

चंपत राय और गोपाल राव का उल्लेख नहीं

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और निर्माण से जुड़े गोपाल राव का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें फिलहाल जांच में दोषमुक्त माना गया है या उनकी भूमिका की पड़ताल आगे की विस्तृत जांच में की जाएगी।

निगरानी व्यवस्था पर सवाल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी 2025 में बनाई गई निगरानी प्रक्रिया (एसओपी) में समय के साथ बदलाव किए गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई। जांच टीम ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है और कहा है कि यह भी विस्तृत जांच का विषय है कि किन परिस्थितियों में इन नियमों को शिथिल किया गया।

अभी जारी है जांच

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जिम्मेदारी, संस्थागत खामियों और सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष शामिल किए जाएंगे।

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