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मुंबई: 30 हजार करोड़ से ज्यादा के साइबर ठगी नेटवर्क में दो गिरफ्तार, 20 राज्यों में 163 मामले!

Mumbai Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में करीब 400 बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के जरिये बड़े पैमाने पर लेनदेन का खुलासा हुआ है।

ईडी ने रविवार देर रात फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया। दोनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को उनका ट्रांजिट रिमांड मिल गया। अब ईडी दोनों आरोपियों को गोवा के पणजी ले जाएगी।

20 राज्यों में 163 एफआईआर

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 163 एफआईआर दर्ज हैं। इसके अलावा 300 से अधिक साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई हैं। इनमें कुल करीब 417.49 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान है।

ईडी ने गोवा में 9 जून 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इस मामले में एक महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच करीब 2.60 करोड़ रुपये एक खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था।

400 बैंक खातों में पहुंचाई गई रकम

ईडी की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम को करीब 400 अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया। इसके बाद रकम को विदेशी मुद्रा में बदलने का भी आरोप है।

मनी ट्रेल की जांच में ट्रेडिंग, ट्रैवल, कमोडिटी और फॉरेक्स से जुड़ी फर्जी संस्थाओं के जरिये 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लेनदेन का पता चला है। इनमें करीब 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे।

ड्राइवर और कर्मचारियों को बनाया कंपनी का निदेशक

ईडी के मुताबिक, ठगी के इस नेटवर्क में फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों में ड्राइवरों और कर्मचारियों को निदेशक बनाया गया था। बताया गया है कि इनमें से कुछ लोग बेहद साधारण मकानों में रहते थे और उनके नाम पर कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए जा रहे थे।

गोवा और मुंबई में हुई छापेमारी

ईडी ने इस मामले में जुलाई और 21 अगस्त को गोवा तथा मुंबई में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान करीब 3.25 करोड़ रुपये की नकदी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

फिलहाल ईडी गिरफ्तार आरोपियों को पणजी ले जाकर मामले में आगे की पूछताछ और मनी ट्रेल की जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी से हासिल रकम किन-किन खातों और फर्जी कंपनियों के जरिये आगे भेजी गई।

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