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जौहर ट्रस्ट जांच: डमी ट्रस्टियों से पूछताछ करेगी ईडी, दानदाताओं और सरकारी बजट पर फोकस!

रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिवार से जुड़े जौहर ट्रस्ट की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में आने वाले दिनों में कई अहम पहलुओं पर पूछताछ होने की संभावना है। ईडी ने इस सप्ताह ट्रस्ट के पदाधिकारियों को तलब किया है। इनमें चौधरी शहरयार सलीम समेत ऐसे पदाधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व में ट्रस्ट में अपनी भूमिका को सीमित बताते हुए खुद को महज ‘डमी ट्रस्टी’ बताया था।

डमी ट्रस्टियों के बयानों से खुलेगा राज

चौधरी शहरयार सलीम ने आयकर विभाग को दिए अपने बयान में कथित तौर पर बताया था कि ट्रस्ट के फैसलों में उनकी कोई प्रभावी भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन से संबंधित बैठक में उनसे केवल दस्तखत कराए गए और इसके बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया।

जांच के दौरान अब ईडी इन बयानों के आधार पर यह जानने का प्रयास करेगी कि ट्रस्ट का वास्तविक संचालन और महत्वपूर्ण फैसले कौन लोग लेते थे। ट्रस्ट के प्रबंधन में आजम खां और उनके परिवार के सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर भी पूछताछ की जाएगी।

सरकारी बजट और संपत्तियों को लेकर जांच

ईडी की जांच में सरकारी अनुबंधों और जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि रामपुर की कुछ निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को सरकारी ठेके मिले और बाद में सरकारी बजट का इस्तेमाल ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों के निर्माण में किया गया।

जांच एजेंसी ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सरकारी विभागों के बजट के कथित दुरुपयोग, सरकारी भूमि से जुड़े मामलों, मस्जिद और समाजवादी पार्टी कार्यालय के निर्माण तथा ट्रस्ट के खातों में जमा कथित नकदी के स्रोत को लेकर भी पूछताछ कर सकती है।

करीब 86 करोड़ रुपये के बजट का मामला

जांच में जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स से जुड़े सरकारी अनुबंधों और करीब 86 करोड़ रुपये के सरकारी बजट के कथित दुरुपयोग का पहलू भी सामने आया है। ईडी इन लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।

इसके साथ ही आजम खां के परिवार के सदस्यों की ट्रस्ट में भूमिका और वित्तीय फैसलों से उनके कथित संबंधों की भी जांच की जाएगी।

जल निगम के ठेकों वाली फर्में भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान ईडी को आजम खां के मंत्री रहने के दौरान जल निगम के ठेके हासिल करने वाली एक दर्जन से अधिक फर्मों के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है। इन फर्मों के संचालकों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

इनमें आफताब नाम के व्यक्ति से जुड़ी फर्मों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उनकी कुछ फर्मों को प्रचार-प्रसार से जुड़े कई काम मिले थे। अब जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इन कारोबारी गतिविधियों और जौहर ट्रस्ट को दिए गए कथित दान के बीच कोई वित्तीय संबंध था या नहीं।

कथित दानदाताओं की भूमिका भी जांच में

आयकर जांच में जौहर ट्रस्ट को दान देने वाले कुछ लोगों और संस्थाओं की पहचान तथा उनके वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठे थे। इनमें पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, सालार ओवरसीज लिमिटेड, एआर एजूकेशन ट्रस्ट, अर्थ इंफ्राटेक, रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स, रॉयल इम्पोरिया इंफ्राटेक, फैजा परवीन, मोहम्मद हसीब, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य नाम बताए गए हैं।

ईडी इन संस्थाओं और व्यक्तियों से जुड़े लेनदेन, दान की वास्तविकता और धन के स्रोत की जांच कर सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था का जांच में नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।