राजनीति नौकरशाहों की नई पसंद (मेरी कलम)
राजनीति नौकरशाहों की नई पसंद
मेरी कलम ...
स्वप्निल द्विवेदी
सभी कहते हैं कि सिस्टम को बदलना है तो फिर सिस्टम में उतरना ही होगा लेकिन वहीं दूसरी ओर यह भी सच है कि एक अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता उसके लिए एक संगठित बल की आवश्यकता होती है। सिस्टम से टकराकर उसे बदलने का हौसला रखने वालों का सामना जब सिस्टम के अंदरूनी चुनौतियों से होगा तो क्या वे व्यवस्था बदल पाएंगे या व्यवस्था उन्हें ही बदल देगी,यह देखना बड़ा ही रोचक होगा।
2013 बैच उ प्र कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को विशेष सचिव राजस्व विभाग, उत्तर प्रदेश के पद पर कार्य करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।13 वर्ष के कार्यकाल के दौरान वे संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रहीं और जतना के हितों के लिए कई सराहनीय कार्य भी किया जिसमें उन्होंने मिर्जापुर की डीएम रहते हुए आजादी के 75 वर्षों के बाद भी समुचित जल व्यवस्था को तरसते पहाड़ी क्षेत्र लहुरियादह गांव में पानी पंहुचाया तथा देवरिया में डीएम रहते हुए सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जा समाप्त करने के लिए आपरेशन कब्जा मुक्ति चलाया। इन्हीं संवेदनशील कार्यों के वजह से वे आम जनता में खासी लोकप्रिय भी रहीं। इस्तीफे की मंजूरी के बाद उन्होंने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक विडियो जारी कर सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपनें विडियो में अपने कार्यकाल के दौरान घटित कुछ घटनाओं का जिक्र भी किया की किस प्रकार कार्य करने की प्रबल इच्छा और व्यवस्था होते हुए भी उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से रोका गया।जिसका प्रभाव सीधे जनता पर पड़ा,जो सिस्टम पर गम्भीर सवाल खड़े करता है। आखिर लोकतंत्र में जनता ही तो सर्वोपरि है।
राजनीति और नौकरशाही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो प्रमुख आधार हैं।एक तरफ जहां राजनीति नीति निर्धारण करती है वही नौकरशाही इसका क्रियान्वयन। लेकिन कई अवसरों पर प्रायः यह देखा गया है कि राजनीतिक दबाव के चलते नौकरशाही चाहते हुए भी वो कार्य नहीं कर पाती जिनके क्रियान्वयन का स्वप्न संजोए वे अफसरशाही में कदम रखती है।इसके विपरीत अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण भी कई सरकारें जनता के समक्ष निरूत्तर और असहज हो जाती हैं। कदाचित इन्हीं कारणों के वजह से दिव्या मित्तल ने अपने अन्तर्मन की आवाज सुनी और सेवा से त्यागपत्र दे राजनीति का रास्ता चुना।
इससे पहले भी देश के समक्ष कई अधिकारीयों ने अपने पद से त्यागपत्र देकर राजनीति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई और अनेक पदों को सुशोभित किया। जिनमें 1968 बैच के आईएएस अजीत जोगी ने अपने पद से त्यागपत्र देकर मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया तथा 1960 बैच के आईएएस यशवंत सिन्हा ने अपने पद से त्यागपत्र देकर अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार में वित्त मंत्री तथा खेमा बदलने के बाद 2022 में संयुक्त विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी रहे।इसी श्रंखला में मीरा कुमार, अरविंद केजरीवाल, अश्विनी वैष्णव इत्यादि के नाम भी प्रमुख हैं।
राजनीति की स्याह डगर इतनी आसान नहीं
लेकिन अधिकांश नौकरशाहों के राजनीति में सफल होंने का एक प्रमुख कारण यह है कि उन्होंने त्यागपत्र देने के बाद किसी बड़ी राजनैतिक पार्टी का दामन थाम लिया। ठीक इसके विपरीत यहां दिव्या मित्तल ने अपनी प्रबल महत्वाकांक्षा और राजनैतिक दृढ़ता दिखाते हुए स्वतंत्र रूप से राजनीतिक भागीदारी रखने का निर्णय लिया है और सम्भव है कि अपने कार्यकाल के दौरान जनता के सांवेदिक पहलुओं और सिस्टम की कमियों और अच्छाईयों का अध्ययन ठीक से करने का लाभ भी उन्हें मिले।
आज प्रदेश की राजनीति में पक्ष विपक्ष की राजनीति के बीच एक तीसरा मोर्चा भी उठ खड़ा हुआ है जो रूढ़िवादी व्यवस्थाओं को बदलने की मांग कर रहा है, आजादी के 80 साल बीतने के बाद भी कुछ कानून जो सामाजिक संतुलन के लिए बने थे उनमें गुणात्मक सुधार की मांग कर रहा है।देश के सभी संसाधनों और सुविधाओं पर सभी वर्गों के समान अधिकार की मांग कर रहा है।देश को केकड़े की तरह खोखला कर रहे भ्रष्टाचार के उन्मूलन की मांग कर रहा है। शिक्षा और रोजगार में समान अवसर और समानता की मांग कर रहा है। इसलिए सम्भव है कि यह मोर्चा धर्म और जाति का खेल खेलकर अपनी रोटियां सेंकने वाले राजनीतिज्ञों के स्थान पर नीतियों और व्यवस्थाओं से भलीभांति परिचित नौकरशाहों को अवसर दे जो कुटिल व्यवस्था से तंग आकर चुनावी रण में कूदने का निश्चय कर चुके हैं।अब देखना बड़ा रोचक होगा कि किस प्रकार दिव्या मित्तल अपने बुद्धि और कौशल से राजनीति के कंटीले रास्तों पर चलती हैं जहां हर एक दिन कदम-कदम पर एक नई चुनौती उनके मजबूत इरादों का इम्तिहान लेगी।
हालांकि सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों का उनके प्रति संवेदना और सहयोग की भावना की बह रही बयार उन्हें निरन्तर आगे बढ़ने जैसा हौसला भी देती रहेगी।
अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार एवं राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। इन्हें साईनव संदेश का आधिकारिक मत न माना जाए। लेख में प्रस्तुत तथ्यों, दावों एवं विचारों के संबंध में लेखक की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर लेख प्रस्तुत किया गया है। आवश्यकतानुसार Sainv Sandesh द्वारा संपादकीय समीक्षा एवं तथ्य-जांच की जा सकती है।
विशेष संवाददाता — पूर्वांचल


Join the conversation