UP Power Crisis: यूपी में 13 बिजली उत्पादन इकाइयां बंद, 5940 मेगावाट उत्पादन प्रभावित; केरल से बिजली लेगा प्रदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन इकाइयों के बंद होने से ऊर्जा विभाग की चुनौतियां बढ़ गई हैं। बुधवार को भी 13 बिजली उत्पादन इकाइयां बंद रहीं, जिससे करीब 5,940 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ। त्योहारी मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 14 सितंबर को अधिकतम मांग 27,407 मेगावाट दर्ज की गई। यूपीएसएलडीसी का दावा है कि रोस्टर के अनुसार निर्धारित आपूर्ति से अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में बुधवार को आपूर्ति 18 घंटे से घटकर करीब 15 घंटे रह गई। स्थानीय फॉल्ट के कारण कई इलाकों में उपभोक्ताओं को महज 10 से 12 घंटे बिजली मिलने की शिकायत है।
13 उत्पादन इकाइयां बंद, 5,940 मेगावाट प्रभावित
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 10 उत्पादन इकाइयां बंद थीं, जिससे 5,340 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा था। मंगलवार तक बंद इकाइयों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। बुधवार को भी इन इकाइयों को शुरू नहीं किया जा सका, जिसका सीधा असर प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर पड़ा।
ऊर्जा विभाग का कहना है कि जल्द ही कुछ बंद इकाइयों को दोबारा शुरू किया जा सकता है। बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने पर लगभग 1,250 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है।
त्योहारों में बिजली आपूर्ति को लेकर अधिकारियों को निर्देश
पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बुधवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बिजली व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
डॉ. गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। विभाग का दावा है कि कुछ उत्पादन इकाइयों के जल्द शुरू होने से बिजली संकट में राहत मिल सकती है।
केरल से 500 से 600 मेगावाट बिजली लेने की तैयारी
बिजली संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश अब केरल से भी बिजली लेने की तैयारी कर रहा है। बुधवार को केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस. दास और उनकी टीम के साथ हुई बैठक में पावर बैंकिंग के माध्यम से बिजली प्राप्त करने पर सहमति बनी।
बैठक में गर्मी के महीनों के दौरान अगले पांच वर्षों के लिए 500 से 600 मेगावाट बिजली प्राप्त करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वर्तमान में उत्तर प्रदेश पीक आवर्स के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के जरिए औसतन करीब 2,400 मेगावाट बिजली ले रहा है।
बारिश और जलभराव से कोयले की आपूर्ति प्रभावित
पिछले कुछ दिनों से कोयला खदान वाले क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण थर्मल पावर प्लांटों को पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा जैसी केंद्रीय, राज्य एवं निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित हुआ है।
बताया गया है कि इन परिस्थितियों के कारण उत्तर प्रदेश को औसतन 1,500 से 2,000 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंची दर
बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में 15 सितंबर को लगभग 16 घंटे तक बिजली की दर करीब 10 रुपये प्रति यूनिट रही। रात के समय पावर एक्सचेंज में बिजली की उपलब्धता और क्लीयरेंस बेहद कम रहा।
15 सितंबर को बिजली की अधिकतम मांग करीब 29,800 मेगावाट थी, जबकि उपलब्धता संबंधी समस्याओं के कारण लगभग 27,000 मेगावाट तक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही थी।
विभाग के अनुसार, दिन में बिजली उपलब्ध होने पर अधिक कीमत पर भी बिजली खरीदकर क्षेत्रों में कटौती रोकने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, रात में 2,000 से 3,000 मेगावाट बिजली की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है।
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